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जनसत्ता में मेरी कहानी "अप्पू की पेंटिंग" अप्पू हाथी पूरे जंगल में अपना स्टूल लिए घूम रहा था पर मोंटू बन्दर उसे कहीं भी नज़र नहीं आ रहा थाI थक हार कर अप्पू एक आम के पेड़ के तने से टिककर बैठ गयाI अप्पू के बैठते ही पेड़ इतनी जोर से हिला कि हीरु तोते के हाथ से पका हुआ आम छूटकर सीधे अप्पू के सिर पर जा गिराI पिलपिला आम गिरते ही अप्पू के चेहरे पर उसका गूदा लग गयाI हीरु तोता डर गया और जैसे ही उड़ने को हुआ अप्पू बोला-"अरे हीरु, तुमने कहीं मोंटू को देखा है क्या?" हीरु बोला-"आज सुबह उसने मेरी बहुत सुन्दर पेंटिंग बनाई थीI उसके बाद तो वह नहीं दिखाI" "मुझे भी अपनी पेंटिंग बनवानी हैI"अप्पू रुआँसा होते हुए बोला हीरु अप्पू की बात सुनकर दुखी हो गयाI वह जानता था कि मोंटू अप्पू की पेंटिंग नहीं बनाना चाहता हैI हीरु कुछ कहता, तब तक अप्पू बोला-"अब मैं क्या करूँ? अगर मैं इतना मोटा हूँ तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है और मोंटू के वो आठ स्टूल मैंने जानबूझकर तो नहीं तोड़े!" हीरु को अप्पू की बात सुनकर बहुत हँसी आईI तभी उसकी नज़र स...
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साहित्य अमृत के फरवरी अंक में मेरी कहानी "वीडियो गेम" चीनू की आँखों से लगातार पानी निकल रहा था पर चीनू की आँखें वीडियो गेम पर टिकी हुई थीI वह एक हाथ से बार-बार अपनी आँखें मसलता और फ़िर अपना चश्मा ठीक करते हुए तेजी से बटन दबाना शुरू कर देताI जैसे ही उसने दसवाँ लेवल पार कर लियाI वह ख़ुशी से उछल पड़ा और सोफ़े पर ही कूदने लगाI उसका चीखना सुनकर उसकी मम्मी घबराई सी भागते हुए आई और बोली-"क्या हुआ, कहीं चोट लग गई क्या?" चीनू हवा में वीडियो गेम लहराता हुआ बड़ी शान से बोला-"ना जाने कितने दिनों की मेहनत के बाद आज जाकर बड़ा कठिन लेवल पार कर पाया हूँI आज जाकर मुझे पता चला कि मेरा का कोई जवाब ही नहीं हैI मैं "बेस्ट" हूँI मम्मी बेचारी अपना सिर पकड़ कर बैठ गई और बोली-" तुम्हारी ऐसी पागलपन के कारण रोज़ स्कूल से तुम्हारी कोई ना कोई शिकायत आती ही रहती हैI बारह साल की उम्र में ही इतना मोटा चश्मा लगाए घूमा करते हो, उसके बाद भी तुम्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ताI" "अरे मम्मी, आपको नहीं पता कि इसमें कितना मजा आता है बस आराम से सोफ़े पर बैठे बैठे आपके हाथ के कुरकुरे चिप्...
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नवम्बर की बाल किलकारी में मेरी कहानी "इस बार जरा हट के दिवाली" " ईको फ्रेंडली दिवाली" " दिवाली आने वाली है I" चूँचूँ चूहे ने उदास होते हुए कहा " क्या..अब हम क्या करेंगे ?" हीरु तोता हरी मिर्च कुतरते हुए बोला " कब है दिवाली ?" मोती कुत्ते ने अपनी पिछली साल की जली हुई पूँछ को देखते हुए पूछा " दस दिन बाद ही तो है I" कालू कौवा घबराते हुए बोला गुटरगूँ कबूतर धीरे से बोला-"पिछली बार तो पटाखों की आवाज़ से मैं और मेरे दोस्त इतना डर गए थे कि हड़बड़ाहट में एक बिजली के तार से टकरा गए थे I" " हाँ...और तुम्हारे दोनों दोस्त करेंट लगने के कारण बच भी नहीं पाए थे I" कालू ने दुखी होते हुए कहा नीलू गाय , मोंटू बन्दर के साथ साथ चुनमुन गिलहरी और पूसी बिल्ली भी दिवाली के अपने दुखभरे किस्से बताने लगी I जहाँ शहर में सभी लोग दिवाली आने पर ख़ुशी से झूम उठते थे , वहीं दूसरी ओर सारे पशु पक्षी बहुत डर जाते थे I ये सब जगमगाती दिवाली को तो बहुत पसँद करते थे पर पटाखों के नाम से थर्रा उठते थे I बहुत देर तक एक दूसरे के स...
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नंदन के सितंबर अंक में मेरी कहानी "पीलू का बर्थडे" अप्पू हाथी रोज़ की तरह अकेला बैठा थाI अब वह किसी के घर नहीं जाता था और चुपचाप अकेले ही बैठा रहता थाI क्योंकि अप्पू जब भी मस्ती मजाक के मूड में आता तो दौड़ने भागने में उसके भारी भरकम शरीर के नीचे दबकर बहुत सारे खिलौने टूट जाते थेI कुछ दिनों पहले ही वह पीलू हिरन के घर खेलने के लिए गया थाI पीलू के घर पर मोंटू बन्दर, बिन्नी बकरी, व्हाइटी बिल्ली और बनी भालू भी थाI तभी पीलू ने अलमारी से बहुत सुन्दर वीडियो गेम निकला, जो उसके मामा सिंगापुर से लेकर आये थेI लाल और नीले रंग का वीडियो गेम रौशनी में चमचमा रहा थाI सभी दोस्त उसको हाथ में लेकर कम से कम एक बार तो ज़रूर खेलना चाहते थे, पर पीलू ने बताया कि मम्मी ने अभी उसमें सैल नहीं डाले है और वह अभी मम्मी से सैल लेकर आएगा फ़िर सब मिलकर उससे खेलेंगेI यह सुनकर उसके सभी दोस्त बहुत खुश हो गएI पीलू ने वीडियो गेम को उनके बीच में रखा और मम्मी को बुलाने के लिए कमरे से बाहर चला गयाI हँसी मज़ाक में अप्पू को ध्यान ही नहीं रहा कि वीडियो गेम ज़मीन पर रखा है और वह जैसे ही खड़ा हुआ उसका पैर वीडियो गेम पर पड़ गय...
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मेरी कहानी "गोलू की राखी" आज गोलू रूठा थाI राखी के दिन भाई रूठा तो बहन भी उसके पीछे पीछे दौड़ कर उसे मना रही थीI सात साल का गोलू वैसे तो किसी बात पर रूठता नहीं था पर आज बात ही कुछ और थीI मम्मी ने जब राखी की थाली तैयार की और मुन्नी को राखी पकड़ाई तो गोलू भाग खड़ा हुआI बेचारी मुन्नी राखी लेकर उसके पीछे दौड़ीI थोड़ी देर बाद दोनों ही हाँफ गए और थक हार कर बैठ गएI मुन्नी गोलू से सिर्फ़ एक साल ही बड़ी थी पर बड़े बुजुर्गों की तरह गोलू से बोली-"बता तो, आख़िर बात क्या है?" "राखी देखी है अपनी!" गोलू ने गोल-गोल गाल गुस्से में फुलाते हुए कहा "हाँ...कितनी सुन्दर तो हैI" मुन्नी चमकीले गोटे वाली राखी को निहारते हुए बोली "पर डोरेमॉन वाली तो नहीं है नाI" गोलू ने राखी की ओर देखते हुए कहा "तो क्या हुआ, ये भी तो कितनी सुन्दर हैI" मुन्नी ने गोलू को मनाते हुए कहा "बस नहीं बँधवानी है बिना डोरेमॉन वाली राखी, तो नहीं बँधवानी हैI" गोलू ने कहा और दौड़ता हुआ बाहर चला गया सामने ही किराने वाले शर्मा अंकल की दुकान थीI त्यौहार के कारण ...
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आज के बाल भास्कर में मेरी कहानी "हैप्पी टीचर्स-डे" हिंदी वाले सर के स्कूल छोड़ने के बाद सातवीं क्लास के नए हिंदी टीचर आ गए थे , बंसी शर्मा I   जब भी क्लास में शर्मा सर थोड़ी देर से आते तो बच्चे उनके नाम का मजाक उड़ाया करते थे I शैतानी में सबसे आगे रहने वाले सागर ने तो उन्हें बंसी मैडम ही कहना शुरू कर दिया था I दरअसल सागर की माँ नहीं थी और पापा घर संभालने के साथ साथ ऑफ़िस भी जाते थे I पर सुबह से रात तक बाहर काम करने के कारण वह सागर की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते थे और उन्होंने उसके लिए एक ट्यूशन भी   लगवा दी थी I ट्यूशन में भी सागर ने दो चार दिन तो ठीक से पढ़ा पर फ़िर उसने पढ़ाई की जगह खेलना कूदना और नदी में जाकर तैरना अच्छे से सीख लिया था I किसी भी सवाल का जवाब नहीं देने के कारण उसे हर दूसरे पीरियड में कक्षा के बाहर खड़ा कर दिया जाता I       यह सज़ा उसकी मनपसंद सजा थी I वह दबे पाँव खेल के म...