
जनसत्ता में मेरी कहानी "अप्पू की पेंटिंग" अप्पू हाथी पूरे जंगल में अपना स्टूल लिए घूम रहा था पर मोंटू बन्दर उसे कहीं भी नज़र नहीं आ रहा थाI थक हार कर अप्पू एक आम के पेड़ के तने से टिककर बैठ गयाI अप्पू के बैठते ही पेड़ इतनी जोर से हिला कि हीरु तोते के हाथ से पका हुआ आम छूटकर सीधे अप्पू के सिर पर जा गिराI पिलपिला आम गिरते ही अप्पू के चेहरे पर उसका गूदा लग गयाI हीरु तोता डर गया और जैसे ही उड़ने को हुआ अप्पू बोला-"अरे हीरु, तुमने कहीं मोंटू को देखा है क्या?" हीरु बोला-"आज सुबह उसने मेरी बहुत सुन्दर पेंटिंग बनाई थीI उसके बाद तो वह नहीं दिखाI" "मुझे भी अपनी पेंटिंग बनवानी हैI"अप्पू रुआँसा होते हुए बोला हीरु अप्पू की बात सुनकर दुखी हो गयाI वह जानता था कि मोंटू अप्पू की पेंटिंग नहीं बनाना चाहता हैI हीरु कुछ कहता, तब तक अप्पू बोला-"अब मैं क्या करूँ? अगर मैं इतना मोटा हूँ तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है और मोंटू के वो आठ स्टूल मैंने जानबूझकर तो नहीं तोड़े!" हीरु को अप्पू की बात सुनकर बहुत हँसी आईI तभी उसकी नज़र स...